रास्ते अब हो चुके हैं अहलदा
किन्तु है एक टीस क्यों आये निकट ?
क्यों दुआएँ हो रहीं हैं बेअसर?
मिल नहीं पाती कोई शहनाई बजने की खबर.
............ सरोज कुमार
किन्तु है एक टीस क्यों आये निकट ?
क्यों दुआएँ हो रहीं हैं बेअसर?
मिल नहीं पाती कोई शहनाई बजने की खबर.
............ सरोज कुमार
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