............क्योंकि मैं सोंचता हूँ.
Sunday, 13 October 2013
चाहत का रंग कैसा था ?
आज कौन आई ?
सोया था मैं
पता नहीं पाया.
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कोसों की थकन
चूर हुईं सांसें
बिखरी हुई आसें
चुका नहीं पाईं
सरक गया अवसर
हाथ छूंछा
गया नहीं पूछा
कि चाहत का रंग कैसा था ?
.............सरोज कुमार
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